# The Untamed Quill > This space is a sanctuary for thoughts that refuse to stay silent. A quiet corner of the internet dedicated to the beauty of expression in all its forms. ## Posts - [क़सूर बस तुम्हारा](https://lawngreen-nightingale-135309.hostingersite.com/%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be/): लिखते-लिखते कभी जो, मैं यूँ ही कुछ दूर निकल जाऊँ, जहाँ बस मेरा पागलपन हो, और मैं एक जुनून में ढल जाऊँ।अगर वहाँ से लौट न पाऊँ, तो यह क़सूर बस तुम्हारा है,मुझे खींचकर इस मुहाने तक लाने वाला नाम तुम्हारा है । जब भीतर कुछ पूरी तरह से टूट-टूटकर बिखरता है,जहाँ हर एक सोया अहसास अचानक सच सा लगता है।जब सीने में कोई उठने लगता है तूफ़ान सा ,और सांसें उखड़ने लगती हैं, मन रहता है बेचैन-हैरान सा। काँपते हाथों में जब यह कलम ठहर नहीं पाती,जब बेचैनी की कोई सीमा तय भी हो नहीं पाती।स्याही के इस मीठे बहकावे में गर […] - [पर्याय से परे...](https://lawngreen-nightingale-135309.hostingersite.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%87/): एक ही अलमारी के दो ख़ानों में,आज रखे हैं कुछ शब्द,मैंने चुन कर,लगते हैं जैसे हों जुड़वाँ भाई ,एक-सी सूरत, एक-सी परछाई, पर दोनों एक दूजे से हैं परे,जो सहज ही उठे कदम, तो उसे प्रयास कहो,जो टकराया बंद दरवाज़ों से, घुटनों पर आ गिरे,उस ज़िद्दी ज़ोर को प्रयत्न लिखना।दिमाग़ का कोई पुराना पन्ना साफ़ हो जाना,तो महज़ भूल जाना है,जो न ठहरा दिल में आकर , ना ही होंठों की मुँडेर तक आए,वो याद न आना हुआ।भूल जाना,कभी-कभी एक फैसला होता है,और याद न आना,सिर्फ़ स्मृति की एक धुंध।जो तड़पा रोटी की जंग में, वो सिर्फ़ भूखा था,जो रहा ख़ाली सब पाकर भी, ताकता रहे जो रात […] - [लिखते-लिखते](https://lawngreen-nightingale-135309.hostingersite.com/hello-world/): लिखते-लिखते,मैं पढ़ सकती हूँ तुम्हारी आँखों में तैरती गर्माहट,हर एक हर्फ़ के दरमियाँ सुन सकती हूँ,तुम्हारी उखड़ती साँसों की साफ़ आहट। सफ़ेद सफ़े की मखमली सतह पर,उँगलियों की वो कड़क पकड़, मैं छू सकती हूँ,और चुपचाप पोंछ सकती हूँ ,तुम्हारे होंठों के कोने में फँसी हुई हल्की सी मुस्कान। मैं सूंघ सकती हूँ हवा में घुलती तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की महक को,और थाम सकती हूँ चुपचाप, तुम्हारी छुपती हुई परछाई को!अभी तो और भी बहुत कुछ है,जो मैं कर सकती हूँ महज़ लिखते-लिखते! मैं मिटा सकती हूँ हमारे बीच की ये मीलों लंबी दूरियाँ,थकी हुई पलकों पर रख सकती हूँ सहलाती हुई उँगलियाँ।तुम्हारी […] ## Pages - [Contact](https://lawngreen-nightingale-135309.hostingersite.com/contact/) - [Poetry](https://lawngreen-nightingale-135309.hostingersite.com/poetry/) ## Optional - [Agent (MCP protocol)](websites-agents.hostinger.com/lawngreen-nightingale-135309.hostingersite.com/mcp) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)