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The Untamed Quill

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Category: Poetry

  • 26 September 2026

    क़सूर बस तुम्हारा

    लिखते-लिखते कभी जो, मैं यूँ ही कुछ दूर निकल जाऊँ, जहाँ बस मेरा पागलपन हो, और मैं एक जुनून में…

  • 26 September 2026

    पर्याय से परे…

    एक ही अलमारी के दो ख़ानों में,आज रखे हैं कुछ शब्द,मैंने चुन कर,लगते हैं जैसे हों जुड़वाँ भाई ,एक-सी सूरत,…

  • 26 September 2026

    लिखते-लिखते

    लिखते-लिखते,मैं पढ़ सकती हूँ तुम्हारी आँखों में तैरती गर्माहट,हर एक हर्फ़ के दरमियाँ सुन सकती हूँ,तुम्हारी उखड़ती साँसों की साफ़…

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  • Poetry (3)

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    26 September 2026

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